ज्ञान का सदुपयोग समाज और राष्ट्रहित में करें: सुमंत कुमार
भागलपुर जिले के आनन्दराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर में मां शारदे की प्रतिमा विसर्जन के साथ “सरस्वती पूजन सह विद्यारंभ संस्कार उत्सव” का कार्यक्रम संपन्न हुआ।उक्त अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सुमंत कुमार ने कहा कि माँ शारदे का पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और विवेक के जागरण का पर्व है। उन्होंने कहा कि सरस्वती पूजन सह विद्यारंभ संस्कार के माध्यम से विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति श्रद्धा, अनुशासन एवं निरंतर सीखने की भावना का विकास होता है। माँ सरस्वती की कृपा से विद्यार्थी विद्या, बुद्धि और विनय—इन तीनों गुणों से युक्त बनते हैं।प्रधानाचार्य कुमार ने आगे कहा कि, विद्यारंभ संस्कार बालक के जीवन की वह पवित्र शुरुआत है, जहाँ से उसका बौद्धिक और नैतिक विकास प्रारंभ होता है। इस प्रकार के संस्कार भारतीय शिक्षा परंपरा की आत्मा हैं, जो विद्यार्थियों को केवल परीक्षा-उत्तीर्ण नहीं, बल्कि सुसंस्कृत नागरिक बनाने का कार्य करते हैं। अंत में उन्होंने माँ शारदे की प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर सभी से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि, हम ज्ञान का सदुपयोग समाज और राष्ट्रहित में करेंगे तथा अपने आचरण से विद्या की मर्यादा बनाए रखेंगे।




