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पीड़िता के बयान के बाद अपहरण आरोपी को सशर्त जमानत

वाराणसी,।शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपहरण के एक चर्चित मामले में आरोपी प्रदुम उर्फ नंदा की जमानत अर्जी स्वीकार कर उसे सशर्त रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत का मतलब आरोपों से पूरी तरह मुक्ति नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया के दौरान दी गई अंतरिम राहत है। प्रकरण के तथ्यों और साक्ष्यों की अंतिम समीक्षा ट्रायल के दौरान की जाएगी।मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच बड़ी बहस चली। न्यायालय ने केस डायरी, पुलिस रिपोर्ट, उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्य तथा मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज पीड़िता के बयान का गहन परीक्षण किया।वादी पक्ष का आरोप था कि 3 फरवरी को आरोपी उसकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इस संबंध में राजातालाब थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपहरण सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। घटना के बाद से ही मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ था।सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद नदीम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 183 के तहत दर्ज पीड़िता का बयान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। बयान में पीड़िता ने स्पष्ट कहा कि वह अपनी इच्छा से गई थी तथा उस पर किसी प्रकार का दबाव, धमकी या लालच नहीं में नही डाला गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जब पीड़िता स्वयं स्वेच्छा की बात स्वीकार कर रही है तो अपहरण की धाराओं की गंभीरता पर पुनर्विचार ज़रूरी है और आरोपी को लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रखना सही नहीं होगा।अभियोजन पक्ष ने पीड़िता की उम्र और मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए आरोपी को सशर्त जमानत प्रदान की। न्यायालय ने ₹50 हजार के निजी मुचलके तथा समान राशि के दो जमानतदारों की शर्त रखी है। साथ ही आरोपी को प्रत्येक सुनवाई पर उपस्थित रहने, गवाहों या पीड़िता को प्रभावित न करने और बिना न्यायालय की अनुमति देश न छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया तो उसे निरस्त किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई नियत तिथि पर होगी तथा जांच की प्रगति पर न्यायालय की नजर बनी रहेगी।

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