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जीआरपी,आरपीएफ व वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 363 जिन्दा कछुए बरामद

अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 72 लाख 60 हजार रुपये, 5 तस्कर गिरफ्तार


वाराणसी।रेलवे स्टेशन परिसरों में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी, पुलिस महानिरीक्षक रेलवे जोन प्रयागराज एन. कोलान्ची, पुलिस अधीक्षक रेलवे अनुभाग प्रयागराज प्रशांत वर्मा तथा पुलिस उपाधीक्षक रेलवे वाराणसी श्री कुँवर प्रभात सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जीआरपी एवं आरपीएफ को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस संयुक्त अभियान के दौरान वाराणसी रेलवे स्टेशन से वन्यजीव तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क उजागर करते हुए 363 जिन्दा कछुओं की बरामदगी की गई है, जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय कीमत लगभग 72 लाख 60 हजार रुपये आंकी गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभारी निरीक्षक श्री रजोल नागर, थाना जीआरपी कैण्ट वाराणसी के नेतृत्व में उपनिरीक्षक राजबहादुर, उपनिरीक्षक गुलाम अख्तर अली, हेड कांस्टेबल मो. दानिश, पवन कुमार, अनुरोध कुमार, अश्वनी सिंह व धर्मेन्द्र कुमार द्वारा न्यू हाल प्रथम की ओर से रेलवे स्टेशन परिसर, प्लेटफार्मों एवं सरकुलेटिंग एरिया में संदिग्ध व्यक्तियों की सघन चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान आरपीएफ पोस्ट वाराणसी के कांस्टेबल वीरेन्द्र कुमार एवं कांस्टेबल सतीश यादव (सीआईबी आरपीएफ) भी टीम के साथ शामिल हो गए।चेकिंग के दौरान जब संयुक्त टीम प्लेटफार्म नंबर 01 से पुराने पुल के रास्ते प्लेटफार्म नंबर 04/05 की ओर बढ़ रही थी, तभी प्लेटफार्म 04/05 के सामने सीढ़ियों के पास 13 जूट के बोरे लिए हुए 5 संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिए। पुलिस को अपनी ओर आते देख सभी युवक घबरा गए, जिससे संदेह और गहरा गया। तत्पश्चात पुलिस टीम द्वारा उन्हें रोककर पूछताछ की गई।पूछताछ में पकड़े गए व्यक्तियों ने अपने नाम क्रमशः विक्रम पुत्र सुरेश कन्जड़ (उम्र 45 वर्ष), बब्बन पुत्र छेदी कन्जड़ (उम्र 35 वर्ष), प्रकाश पुत्र बबआ कन्जड़ (उम्र 20 वर्ष), राहुल पुत्र बबली कन्जड़ (उम्र 20 वर्ष) तथा शुभम पुत्र विक्रम कन्जड़ (उम्र 20 वर्ष) बताए। सभी आरोपी ग्राम पकड़ी, थाना कोतवाली देहात, जनपद सुल्तानपुर के निवासी हैं।जब पुलिस ने जूट के बोरों के बारे में पूछताछ की तो आरोपियों ने स्वीकार किया कि बोरों के भीतर कछुए भरे हैं, जिन्हें वे अवैध रूप से पश्चिम बंगाल ले जा रहे थे। प्रथम दृष्टया मामला वन्यजीव तस्करी से जुड़ा पाए जाने पर तत्काल इसकी सूचना क्षेत्रीय उप वन अधिकारी वाराणसी रेंज श्री राजकुमार गौतम को दी गई।सूचना पर वन विभाग की टीम उप क्षेत्रीय वन अधिकारी श्री राजकुमार गौतम, वन दरोगा श्री अनिल श्रीवास्तव तथा वनरक्षक राहुल कुमार बलवन्त मौके पर पहुंची। वन विभाग व पुलिस टीम के संयुक्त सहयोग से सभी 13 जूट के बोरों को खोलकर कछुओं को बाहर निकाला गया। गिनती करने पर कुल 363 अदद जिन्दा इंडियन सॉफ्ट शेल टर्टल बरामद हुए।वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ये कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में संरक्षित प्रजाति के अंतर्गत आते हैं। इनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 72 लाख 60 हजार रुपये बताई गई है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर एवं सुल्तानपुर जिलों के विभिन्न तालाबों से कछुओं को पकड़कर अवैध रूप से पश्चिम बंगाल ले जाकर बेचने की योजना बना रहे थे।विधिक कार्यवाही के लिए करीब कल दोपहर सभी बरामद कछुओं को आरोपियों सहित वन विभाग की टीम के सुपुर्द कर दिया गया। आगे की कानूनी कार्रवाई वन विभाग द्वारा की जा रही है।यह कार्रवाई जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की अवैध तस्करी से न केवल दुर्लभ प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर पहुंच जाती हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।सराहनीय भूमिका निभाने वाली टीम इस सफल अभियान में प्रभारी निरीक्षक रजोल नागर जीआरपी कैण्ट, प्रभारी निरीक्षक संदीप कुमार यादव आरपीएफ पोस्ट, उपनिरीक्षक राजबहादुर, उपनिरीक्षक गुलाम अख्तर अली, हेड कांस्टेबल मो. दानिश, पवन कुमार, अनुरोध कुमार, अश्वनी सिंह, धर्मेन्द्र कुमार, कांस्टेबल वीरेन्द्र कुमार एवं कांस्टेबल सतीश यादव (सीआईबी आरपीएफ) की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।पुलिस एवं वन विभाग की इस सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से न केवल सैकड़ों वन्यजीवों की जान बची है, बल्कि वन्यजीव तस्करी के संगठित नेटवर्क को भी करारा झटका लगा है।

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