शबे-बारात पर संगम विहार कब्रिस्तान में अकीदत का सैलाब, पूरी रात दुआ और इबादत का माहौल

मोमना बेग़म
नई दिल्ली | शबे-बारात के मुबारक और पाक मौके पर दक्षिणी दिल्ली के संगम विहार स्थित कब्रिस्तान में अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मगरिब की नमाज़ अदा होते ही लोग अपने-अपने मरहूम रिश्तेदारों की कब्रों पर फातिहा पढ़ने, दुआ करने और उनकी मगफिरत की कामना के लिए कब्रिस्तान पहुंचने लगे। पूरी रात कब्रिस्तान इबादत, कुरआन-ख्वानी और दुआओं से गुलज़ार रहा।शबे-बारात को इस्लाम में बेहद अहम रात माना जाता है। इस रात को रहमत, बख़्शिश और तौबा की रात कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात अल्लाह तआला अपने बंदों के गुनाह माफ़ फरमाता है और आने वाले साल का मुक़द्दर लिखा जाता है। इसी अकीदे के चलते संगम विहार ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तान पहुंचे।अकीदतमंदों ने कब्रों की साफ-सफाई की, फूल चढ़ाए और अगरबत्ती जलाई। कई लोगों ने अपने मरहूम माता-पिता, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों के लिए ख़ास दुआएँ कीं। बुज़ुर्गों के साथ-साथ महिलाओं और नौजवानों की भी अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिली। कई परिवार अपने बच्चों को भी साथ लाए, ताकि वे इस पाक रात की अहमियत और अपने बुज़ुर्गों की याद को समझ सकें।भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। वहीं समाजसेवी संगठनों और स्थानीय युवाओं ने भी व्यवस्था संभालने में सहयोग किया। कब्रिस्तान परिसर में रोशनी, पीने के पानी और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे किसी को कोई परेशानी न हो।शबे-बारात के मौके पर संगम विहार क्षेत्र में अमन, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश देखने को मिला। लोगों ने न सिर्फ अपने लिए बल्कि देश में अमन-शांति, तरक्की और भाईचारे के लिए भी दुआ की। यह पाक रात लोगों को सब्र, इंसानियत और नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती नज़र आई।


