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विधायक सुशील सिंह के पहल पर पकड़े जा रहें आतंकी बंदर

चंदौली। सैयदराजा विधानसभा के ग्रामसभा डेढगावा में कई दिनों से बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बंदरों के हमले से रोज कोई न कोई घायल हो रहा है। आम जनमानस में भय के साथ बंदरों को लेकर काफ़ी रोष व्याप्त है। डेढगावा में बंदरों के आतंक से निजात दिलाने और बार-बार स्थानीय लोगों पर बंदरों के हमले की खबरों के बाद क्षेत्रीय विधायक सुशील सिंह ने संज्ञान लिया। उन्होंने तत्काल कदम उठाया और एक पत्र जारी करके प्रभागीय वनाधिकार को बंदरों को पकड़ने के लिए निर्देशित किया। वनाधिकार द्वारा मथुरा से एक टीम बुलाई गई। मंगलवार को शुरू हुए इस अभियान के पहले दिन ग्रामसभा डेढगावा में जाकर तीन बंदरों को पकड़ा गया। बंदर पकड़ने के लिए टीम के पास एक बड़ा पिंजरा मौजूद है, जबकि इसके बाद उन्हें छोटे पिंजरों में शिफ्ट किया जा रहा है। 

बंदर क्यों आ गये इंसानों की बस्ती में?

लेकिन बात सिर्फ वानरों की नहीं है। तमाम राज्यों में कई वन्य जीव अब इंसानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं और यह संघर्ष बढ़ता ही जा रहा है। जंगलों का लगातार खत्म होते जाना और वन विभाग द्वारा आर्थिक मुनाफे के लिये फलविहीन ‘मोनोकल्चर फॉरेस्ट’ लगाना इसकी एक बड़ी वजह है। ऐसे जंगल शाकाहारी वन्य जीवों के किसी काम के नहीं।इसके चलते मांसाहारी जानवरों और उनके शिकार के बीच का संतुलन भी गड़बड़ा गया हैवइसलिये पहाड़ी राज्यों में तेंदुये और बाघ अब गांवों में अधिक आने लगे हैं।

क्या बनेगा यह एक चुनावी मुद्दा?

⚡यह बात थोड़ा हैरान करती है कि विधानसभा या लोकसभा चुनावों में बंदरों का उत्पात अभी तक दिल्ली में चुनावी मुद्दा नहीं बना है,जबकि इससे आम और खास सभी लोग प्रभावित होते हैं और इनसे निपटने में हर साल करोड़ों रुपया खर्च होता है।

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