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भ्रष्टाचार के आरोप में तहसीलदार को 4 साल की सजा, एक लाख जुर्माना

इंदौर। म प्र राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, राजस्व विभाग में बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के तहसीलदार संजय वाघमारे को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम विकास शर्मा द्वारा 4 साल जेल की सजा सुनाई गई है। तहसीलदार संजय वाघमारे कोर्ट में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के दोषी पाए गए हैं। कोर्ट ने उन पर ₹100000 का जुर्माना भी लगाया है।

तहसीलदार संजय वाघमारे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया

इंदौर जिला अभियोजन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव के मुताबिक इस मामले में दो अन्य सह आरोपितों चंदर सिंह सोलंकी व निहाल सिंह निवासी इंदौर को भी सजा सुनाई गई है, जबकि दो सह आरोपी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के बालकृष्ण शर्मा व अर्चना जैन की मृत्यु हो चुकी है। सजा सुनाए जाने के दौरान सभी आरोपित न्यायालय में मौजूद थे। वहीं से उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। तहसीलदार संजय वाघमारे के जेल जाने की पुष्टि कलेक्टर प्रवीण सिंह ने की है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त पुलिस द्वारा शासन को इस संबंध में सूचना दी जाएगी। इसके बाद शासन अन्य कार्रवाई के संबंध में निर्णय लेगा।

कंसोटियम बैंक क्रेडिट योजना में घोटाला हुआ था

अभियोजन अधिकारी के मुताबिक आरोपित निहाल सिंह ने 1997 से 2004 के बीच खादी ग्रामोद्योग से कंसोटियम बैंक क्रेडिट योजना के तहत अनुपम फ्रेब्रीकेशन उद्योग स्थापित करने के लिए ऋण लिया था। गुण नीति के विपरीत जाकर लोक सेवक संजय वाघमारे, जितेंद्र वर्मा, चंदर सिंह सोलंकी, अर्चना जैन और बालकृष्ण शर्मा ने षड़यंत्र रचकर ऋण की राशि 5.20 लाख और मार्जिन मनी 2.40 लाख रुपये लेकर अवैध लाभ कमाया था। जांच के बाद लोकायुक्त ने संजय वाघमारे, तत्कालीन नायब तहसीलदार जितेंद्र वर्मा, तत्कालीन उप संचालक खादी ग्रामोद्योग चंदर सिंह सोलंकी और निहाल सिंह के खिलाफ 2014 में धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया था। करीब सात साल तक चली सुनवाई के बाद शुक्रवार को न्यायालय ने फैसला सुनाया।

मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार निवारण- किस अधिकारी को किस अपराध में कितनी सजा

विशेष न्यायाधीश ने आरोपित संजय वाघमारे निवासी जवाहर लाल मार्ग इंदौर को धारा 120बी व 420 के तहत चार-चार साल का सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (डी) व सहपठित धारा 13 (2) में चार साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसी तरह आरोपित चंदर सिंह सोलंकी निवासी कन्हैया नगर एक्सटेंशन इंदौर को धारा 120बी व 420 के तहत चार-चार साल का सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड व धारा 409 में पांच साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (डी) व सहपठित धारा 13 (2) में चार साल के सश्रम कारावास व 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। तीसरे आरोपित निहाल सिंह निवासी ग्राम बचौड़ा देपालपुर को धारा 120बी व 420 के तहत चार-चार साल का सश्रम कारावास व 50-50 हजार रुपये अर्थदंड, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (डी) व सहपठित धारा 13 (2) में चार साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक ज्योति गुप्ता ने पैरवी की थी। (भो.स.)

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