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रहस्यमयी बुखार: कोरोना का कोई नया वैरिएंट तो नहीं?

 

वाराणसी। मौसम के बदलाव के चलते बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। सरकारी अस्पतालों में बच्चों समेत अनेकों लोगों को भर्ती कराया गया है। ओपीडी में ज्यादातर मरीज बुखार, सर्दी के आ रहे हैं । हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यह सीजनल फ्लू है। वहीं दूसरी ओर वायरल के मरीज अचानक बढ़ने से अस्पतालों में दहशत का माहौल है। शासन ने अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि ओपीडी में इलाज से पहले मरीजों का एंटीजन टेस्ट कराया जाए। परन्तु ऐसे पीड़ितों का इलाज बिना कोरोना टेस्ट कराये ही हो रहा है। लोगों के मन मे दहशत है कि रहस्यमयी बुखार कहीं कोरोना का कोई और वैरिएंट तो नहीं है ? क्योंकि वैज्ञानिकों के दावे को सही माना जाए तो सितम्बर माह में कोरोना के तीसरे लहर की संभावना व्यक्त किया गया था। एसएसपीजी कबीरचौरा, एलबीएस अस्पताल रामनगर में बुखार से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने हेतु लंबी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ओपीडी में बुखार, सर्दी, जुकाम से बहुतायत की संख्या में पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों की मानें तो मौसम तेजी से बदलाव के कारण आद्रता बढ़ने से वायरस के चलते मामलों में इजाफा हुआ है।

रहस्यमयी बुखार दवाएं बेअसर- रहस्यमयी बुखार में शरीर का तापमान अचानक 104 तक पहुंच जा रहा है और दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं। जिसके

रहस्यमयी बुखार की पुष्टि नहीं- डॉ. एस. के. उपाध्याय

अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं । परिवार कल्याण वाराणसी मण्डल डॉ. एस. के. | उपाध्याय ने पत्रकार को बताया कि कोई रहस्यमयी बुखार नहीं है। मौसम में आये बदलाव के चलते लोगों को बुखार, उल्टी व डायरिया की शिकायत हो रही है। कहा कि जनपद के सभी सीएचसी, मण्डलीय व जिला अस्पताल में जांच कराई जा रही है। रक्त की जांच रिपोर्ट में जिस बीमारी की पुष्टि होती है उसका इलाज किया जा रहा है। पं.दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय को एलर्ट मोड में रखा गया है।

चलते प्रदेश के कई जिलों में अनेकों लोग काल कवलित हो गए हैं। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से कोई जारी नहीं किये गए हैं। स्वास्थ्य महकमे से जुड़े लोगों की मानें तो प्रदेश के पश्चिमी जिलों से शुरू हुई इस रहस्यमयी बीमारी ने वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, आगरा, कानपुर, एटा, कासगंज, देवरिया, आजमगढ़, सुल्तानपुर, गाजीपुर में भी अपने पैर पसार लिए हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की कोई तैयारी मुकम्मल न होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में लोग बेड खाली होने के इंतजार में आस लगाए बैठे रह रहे हैं ।

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