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ओमीक्रॉन वेरिएंट : कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार है DRDO का पंडित राजन मिश्र अस्पताल

वाराणसी ब्यूरो

वाराणसी। पूरा देश इस समय कोरोना के ओमीक्रॉन वेरिएंट से सहमा हुआ है। दक्षिण अफ्रीका से चला यह ओमीक्रॉन वेरिएंट अब भारत में भी दस्तक दे चुका है। कर्नाटक में इसके दो पॉज़िटिव केस मिले हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार भी सतर्कता बरत रही है। प्रदेश के सभी हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर एक बार फिर आरटीपीसीआर टेस्ट को अनिवार्य किया गया है। इन्ही सब के बीच प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मई 2021 में बने रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) के अस्पताल इस ओमीक्रॉन वेरिएंट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दिल्ली में कोरोना से मृत बनारस घराने के संगीत के पुरोधा पंडित राजन मिश्र को समर्पित इस अस्पताल में सभी तैयारियां चाक चौबंद हैं। सूत्रों की माने तो आदेश मिलते ही इसे एक बार फिर शुरू कर दिया जाएगा। बरसात शुरू होने और कोरोना की दूसरी लहर से राहत मिलने के बाद मरीज़ों की संख्या कम होने पर इस अस्थायी कोरोना अस्पताल को बंद किया गया था। DRDO अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि हमारा अस्पताल किसी भी आपात स्थिति से लड़ने के लिए हर वक़्त तैयार है। मई के महीने में जो सुविधाएं इसमें थीं वो यथावत हैं। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए इसे एक दिन के अंदर शुरू किया जा सकता है।

बता दें कि पंडित राजन मिश्र अस्थायी हॉस्पिटल बीती 10 मई को बीएचयू मे खुला था। इससे पहले इसे 16 दिन में तैयार किया गया था। 750 बेड के इस अस्पताल में 250 बेड आईसीयू के हैं और 500 बेड ऑक्सीजन की सुविधा से लैस हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 750 बिस्तरों वाला यह अस्पताल डीआरडीओ द्वारा स्थापित किया गया है और इस अस्पताल में सशस्त्र बलों द्वारा देश भर से चिकित्सा विशेषज्ञों, डॉक्टरों, नर्सिंग और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों को सेवा में लगाया गया था। सरकारी बयान के अनुसार अस्पताल में सभी बिस्तरों को ऑक्सीजन युक्त बनाया गया और यह अस्पताल 40 के एल ऑक्सीजन से सुसज्जित है जो तीन टैंकों में संग्रहित है। मई में इस अस्पताल में राज्य सरकार ने अस्पताल को चलाने के लिए आवश्यक सुविधाओं की आपूर्ति, ऑक्सीजन, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जैव-चिकित्सा और अन्य अपशिष्ट प्रबंधन और रोगी प्रबंधन प्रणाली जैसे सभी प्रमुख कार्यों की सुविधा प्रदान की थी, यहां सभी मरीजों को दवाइयां और खाना मुफ्त उपलब्ध करायी जा रही थी।

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