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मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री करेंगे 25 दिसम्बर से शुरू होने वाले माण्डू उत्सव का उद्घाटन, मांडू में ही केबिनेट मीटिंग भी प्रस्तावित

माण्डू फेस्टिवल का भव्य आयोजन 25 दिसम्बर से 29 दिसम्बर तक

धार – जिले के प्रमुख उत्सव माण्डू फेस्टिवल का भव्य आयोजन 25 दिसम्बर से 29 दिसम्बर तक होगा। वर्ष 2019 की भांति इस बार माण्डू फेस्टिवल पूर्व भव्यता और पूरी रौनक के साथ होगा। जिसमें देश के ख्यातिनाम  कलाकार सुसज्जित रंगमंच पर अपनी प्रस्तुतियॉ देगे।

मंचीय कार्यक्रम 5 दिवसीय रहेंगे तथा अन्य गतिविधियां तथा टेंट सिटी लगातार 2 माह तक जारी रहेंगी। प्रस्तावित कार्यक्रम अनुसार इस वर्ष मांण्डू उत्सव का उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। साथ ही केबिनेट की बैठक भी माण्डू में किया जाना प्रस्तावित है।



माण्डू उत्सव की तैयारियों के परिप्रेक्ष्य में कलेक्टर धार डॉ पंकज जैन ने समयावधि पत्रों की बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान केे आगमन एवं केबिनेट बैठक की संभावनाओं को देखते हुए माण्डू उत्सव संबंधित विभागीय तैयारियॉ शीघ्र पूर्ण कर ले। माण्डू फेस्टिवल आयोजक इवेंट कम्पनी के राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि उत्सव में सायकिल टूर, स्टोरी टेलिंग, इस्टाग्राम लाइव टूर, आर्ट एंड क्राफ्रट प्रदर्शनी आदि गतिविधियां 2 माह 25 फरवरी तक निरंतर जारी रहेंगी।

माण्डू फेस्टिवल में हॉट एयर बैलून की उड़ान तथा साहसिक गतिविधियां भी प्रतिवर्ष की भॉति संचालित होगी। साथ ही कला प्रदर्शनी, विलेज टूर , हेरिटेज वाक आदि गतिविधियां भी होंगी।

बैठक में इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकरी जिला पंचायत आशीष वशिष्ठ, अपर कलेक्टर सलोनी सिडाना सहित जिला अधिकारी मौजूद रहे।

मांडव (मांडू) –

मांडव शहर धार से लगभग 35 किमी और इंदौर से 100 किमी दूर स्थित है और मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। यह मालवा क्षेत्र में स्थित है। यह आधिकारिक भाषा हिंदी है। मांडव या मांडू, अपने सामरिक स्थिति और प्राकृतिक सुरक्षा के कारण अपने दिनों में वापस एक महत्वपूर्ण सैन्य चौकी थी- पहाड़ों की विंध्य श्रृंखला और नर्मदा नदी जिसने दुश्मन के रास्ते को अवरुद्ध कर दिया, इस प्रकार उत्तर में प्रवेश करने की एकमात्र दिशा के रूप में छोड़ दिया और तीन मांडू के किले वाले शहर में प्रवेश करने के लिए द्वार- आलमगीर गेट, भंगी गेट और दिल्ली गेट। भंगी गेट के बाद सड़क मार्ग से दिल्ली गेट और गाडी गेट तक जाती है। मांडू का विस्तृत और अब मुख्य रूप से सुनसान पहाड़ी शीर्ष किला मध्य भारत के सबसे दिलचस्प स्थलों में से एक है। यह काकड़ा खोह नामक एक गहरी और चौड़ी घाटी द्वारा उत्तर से टेबल भूमि से अलग-थलग बहिर्गमन है जो इसे पूर्व, पश्चिम और उत्तर में घेरता है, जिसके ऊपर एक प्राकृतिक कारण मुख्य शहर के द्वार तक चलता है। मांडू के दक्षिण में भूमि नीचे की ओर मुख्य मैदान तक नीचे की ओर बहुत नीचे गिरती है और दृश्य शानदार है। किले के कब्जे वाले 20 वर्ग किलोमीटर के पठार के किनारों में गहरी खदानें कट गईं। खंडहर 21 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। मुस्लिम शासकों ने इसे शादियाबाद या सिटी ऑफ जॉय करार दिया।

मांडवगढ़ या मांडव या मांडू अपने अद्भुत किले के लिए प्रसिद्ध है। किला 82 किमी की परिधि में है और इसे भारत में सबसे बड़ा माना जाता है। इसमें महलों, सजावटी नहरों, स्नान मंडपों आदि के खंडहर हैं। यह किला एक समय मुगल सम्राटों का मानसून पीछे हटने वाला था। मांडू में 40 से अधिक स्मारक हैं, जिन्हें तीन श्रेणी में बांटा गया है: केंद्रीय ग्राम समूह, रॉयल एन्क्लेव समूह और रीवा कुंड समूह। यह शहर रानी रूपमती और बाज बहादुर की पौराणिक कथा के लिए भी प्रसिद्ध है जो आज भी महल का शिकार करता है। चंपा बावड़ी – एक कुआं, 15 वीं शताब्दी की विशाल जामी मस्जिद, खूबसूरत जाहज़ महल (जहाज महल), हिंडोला महल, रोमांटिक बाज़ महल, रूपमती का मंडप और होशंग शाह का मकबरा वास्तुकला के कुछ अनमोल रत्न हैं और इन्हें पर्यटन स्थलों को देखना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि सम्राट शाहजहाँ ने ताज महल के निर्माण की प्रेरणा केवल होशंग शाह के मकबरे से ली थी। मांडू मानसून में घूमने के लिए आदर्श स्थान है, जब मौसम खुशनुमा होता है और चारों ओर खिलता है। हरे-भरे परिदृश्य और बैंगनी सूर्यास्त आकाश के बीच स्मारकों की रहस्यमय सुंदरता, बीते युग की जीवंत तस्वीर को चित्रित करती है। प्रभाव आम के आस-पास के अमीर, इमली और बरगद के पेड़ से पूरा होता है। यह महल अपने “खुसरानी इमली” के लिए भी प्रसिद्ध है।

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