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गोवा में जाति और धर्म की राजनीति कभी नहीं हुई : प्रभुदेसायी

गोवा में जाति-धर्म की राजनीति फेल ?

मडगांव :- बीजेपी ने भारी एंटी इंकम्बेंसी और करप्शन के चलते मौजूदा विधायकों के टिकट काटे और कांग्रेस से आए नेताओं को उम्मीदवार बना दिया, लेकिन इस जोड़तोड़ की राजनीति का आम लोगों के बीच पॉजिटिव रिस्पॉन्स नजर नहीं आ रहा। ‘अजब गोवा की गजब पॉलिटिक्स’ नाम की किताब लिखने वाले ऑथर संदेश प्रभुदेसायी का कहना है कि, गोवा में जाति और धर्म की राजनीति कभी नहीं हुई।

बीजेपी नेता रहे मनोहर पर्रिकर ने भी ऐसा करने की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हुए थे। फिर जब उन्होंने इसे छोड़ दिया और डेवलपमेंट पर बात की तो उन्हें जीत मिली। दरअसल, गोवा में 12 तहसील हैं। इनमें से 4 कोस्टल एरिया में आती हैं, जहां की अधिकांश आबादी ईसाई है।

कुल 40 सीटों में से 24 सीटें, इन्हीं 4 तहसीलों में आती हैं, यानि आधी से ज्यादा सीटों पर ईसाई वोट ही निर्णायक होते हैं, इसलिए गोवा हिंदू और ईसाई के गठजोड़ से ही चुनाव जीता जा सकता है। 2012 में बीजेपी इसी फॉर्मूले पर जीती थी, लेकिन इस बार ईसाई उसे सपोर्ट करते नहीं दिख रहे हैं। चर्च की संस्था ने बीजेपी को सपोर्ट न करने की एडवाइजरी भी जारी कर दी है। वे देश में जाति के नाम पर हो रही राजनीति के चलते बीजेपी से नाराज हैं।

तीनों फैक्टर के चलते कांग्रेस सबसे मजबूत

एंटी इंकम्बेंसी, जाति की राजनीति और दूसरी पार्टियों से आए लोगों को टिकट देने के चलते बीजेपी से उसका कैडर ही नाराज हो गया है। वहीं, कांग्रेस ने इस बार जोड़तोड़ करने वालों को टिकट नहीं दिए हैं, जिससे उसकी इमेज पहले से ठीक हुई है। चर्च से जुड़ी कमेटी ने भी बीजेपी को वोट न देने की अपील की है, ऐसे में यह वोट कांग्रेस में ही जाना है। dB

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