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गुना बर्बरकांड के खिलाफ जयस मैदान मे : विधायक डॉ अलावा

भोपाल : (मप्र.) मध्य प्रदेश में आदिवासियों पर अत्याचार और बमोरी में जमीन विवाद को लेकर एक महिला को जिंदा जलाने के मामला अब गरमाने लगा है। इस घटना के घटित होने के बाद से ही जगह जगह आदिवासियो द्वारा आरोपियों के खिलाफ फांसी देने के लिए प्रदर्शन और आंदोलन किया जा रहा हैं। अब इस मामले को लेकर आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए काम करने वाले संगठन जयस (जन आदिवासी युवा शक्ति संगठन) गंभीरता से मैदान में उतर चुका है। जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा भी आंदोलन में हिस्सा लेने गुना पहुचे जहा उन्होंने रविवार को शहर के दशहरा मैदान से हुंकार भरी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।


उन्होंने कहा आदिवासियों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं होगा। वहीं गुना के धनोरिया में कथित तौर पर सेहरिया महिला को जिंदा जलाकर हत्या करने वाले आरोपियों को फांसी की सजा और पीड़ित परिवार को 5 करोड़ के मुआवजे की मांग की। जयस ने मंच से भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया, कहा कि मामा की सरकार में भी आदिवासियों को सम्मान नहीं मिल रहा है। वहीं कांग्रेस पर भी अपना गुस्सा निकाला। जयस के आंदोलन में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह, मनावर विधायक एवं जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा सहित हजारों जयस कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शन में अन्य जिलों और प्रदेश के पदाधिकारी भी मौजूद थे। जयस के आंदोलन को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।


ज्ञात हो कि जयस आदिवासीयों का एक राष्ट्रीय संगठन है जिस के राष्ट्रीय संरक्षक मनावर के विधायक डॉ हीरालाल अलावा है। जिन्होंने अपने विधायक बनने के बाद से ही जयस के द्वारा प्रदेश व देशभर में आंदोलन भी किए और समाज के हित में सरकार से अपनी लड़ाई लड़ी। विधायक डॉक्टर अलावा ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की लड़ाई आदिवासी के हित में हमेशा लड़ी जाएगी और देश में किसी भी आदिवासी पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक आदिवासी महिला को जिंदा जलाने का मामला बेहद शर्मसार कर देने वाला है, प्रदेश सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए, आरोपियों को फांसी और परिवारों को मुआवजा देना चाहिए, जिसकी हम मांग करते हुए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासियों के हित में कानून बनाए, जिससे वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। उन्होंने कहा कि तभी आदिवासी सुरक्षित महसूस करेंगे, वरना सरकार का आदिवासियों के प्रति सब दिखावा माना जाएगा।

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