Breaking News

मध्य प्रदेश के धार जिले में बांध फूटने से बचाने के लिए सेना रवाना हुईं, बीते 2 दिनों से जिला प्रशासन ने राहत बचाव के कार्य किए।

धार : (मप्र.) मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्र धार जिले की धरमपुरी तहसील के कारम नदी पर बने बांध को फूटने से बचाने के लिए सेना रवाना हो गई है। दो सो जवानों में लगभग चालीस इंजीनियरिंग के दल के जवान और अधिकारी भी शामिल है। इसके अलावा एनडीआरएफ की टीमों को भी रवाना किया गया।



गृह विभाग के अधिकारी ने बताया कि धार के कारम बांध साइट के लिए 5 कॉलम आर्मी के रवाना हो गए हैं। इनमें 1 कॉलम इंजीनियरिंग का है। प्रत्येक कॉलम में लगभग 40 जवान हैं। वहीं, एनडीआरएफ की 3 अतिरिक्त टीम 1 भोपाल, 1 वड़ोदरा, 1 सूरत से बचाव सामग्री के साथ दिल्ली से धमनोद के लिए रवाना की जा रही हैं। प्रत्येक एनडीआरएफ टीम में 30-35 प्रशिक्षित बचाव कर्मी है। वहीं, एसडीईआरएफ के 8 अतिरिक्त दल (प्रत्येक में 10-12 सदस्य) भी प्रदेश के अन्य जिलों से और भोपाल से डीजी एचजी रिजर्व से रवाना कर दिए गए हैं। एयरफोर्स के 2 हेलिकॉप्टर अभी स्टैंडबाय पर रखे हैं। इंदौर संभाग और धार जिले के सभी सम्बंधित उच्च अधिकारी रात में धामनोद और बांध साइट पर ही रुकेंगे और बचाव कार्य का कार्य सतत निगरानी करेंगे।



धार जिले की धरमपुरी तहसील के ग्राम कोठीदा भारुडपुरा में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे निर्माणाधीन बांध में पहली ही बारिश में रिसाव शुरू हो गया है। कारम मध्यम सिंचाई परियोजना के बांध के दाएं हिस्से में 500-530 के मध्य डाउन स्ट्रीम की मिट्टी फिसलने से बांध को खतरा पैदा हुआ था। इस बांध की लंबाई 590 मीटर और ऊंचाई 52 मीटर है। वर्तमान में इसमें 15 एमसीएम पानी इस बांध में जमा है। लीकेज की खबर मिलते ही इंदौर के आईजी और कमिश्नर तथा धार व खरगोन के कलेक्टर और एसपी तथा वही प्रदेश के उद्योग मंत्री राजवर्धन दत्तीगांव, तुलसी सिलावट, क्षेत्रीय विधायक पाची लाल मेंणा साथ ही युवा नेतृत्व रेवतीरमण राजूखेड़ी आदि घटनास्थल पर पहुंचे। जिन्होंने मौके का मुआयना किया और राहत एवं बचाव कार्य मैं सहयोग किया।

एहतियात के तौर पर धार जिले के बारह और खरगोन के छह गांवों को खाली कराया गया है। राहत शिविर बनाकर उसमें लोगों को शिफ्ट किया है। एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ की टीमें तैनात की गई है।

आगरा-मुंबई नेशनल राजमार्ग-तीन (AB रोड) कुछ घंटों के लिए बंद कर तेजी से बांध की मरम्मत का काम शुरू किया गया। भोपाल और इंदौर के विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद है। बांध का पानी खाली कर बांध की दीवार में राहत-बचाव का कार्य किया जा रहा है। समय रहते यदि राहत कार्य नहीं किया गया तो कई गांव बाढ़ के शिकार हो सकते हैं। जल संसाधन विभाग बांध को सुरक्षित रखने के लिए कार्य कर रहा है।



कलेक्टर ने कहा…

मौके पर उपस्थित जिले के कलेक्टर डॉक्टर पंकज जैन ने बताया कि एहतियात के तौर पर जिन गांव को चपेट में आने की आकांक्षा है उन्हें खाली कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। लगातार गस्त दल लोगों को सचेत कर रहा है, उन्होंने बताया कि पहली कोशिश यही है कि पानी रिलीज किया जाए जिसके लिए साइड चैनल पाइप के गेट खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों की राहत के लिए धामनोद में भी कैंप बनाए गए हैं और भोजन सामग्री की व्यवस्था की जा रही है। कोशिश यही रहेगी कि इस आपदा में कोई भी जान माल का नुकसान ना हो।

अपने पूर्वजों के मकान छोड़कर जाने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि अचानक आने वाली इस आपदा के कारण हमें हमारे पूर्वजों के मकान और गांव को छोड़कर अन्य स्थान पर जाना पड़ रहा है, उन्होंने बताया कि प्रशासन लगातार सभी ग्रामीणों को अलर्ट कर रहा है की सुरक्षा की दृष्टि से यह जगह खाली करके सुरक्षित स्थान पर जाए। ग्रामीणों ने उम्मीद की है कि यह आपदा एक छोटी आपदा बन कर बीत जाए, जिससे कि उनके गांव में किसी प्रकार का नुकसान ना हो।

धार कलेक्ट्रेट से आदेश जारी

जिला प्रशासन में सुरक्षा की दृष्टि से देखते हुए पत्र द्वारा लिखित आदेश जारी करते हुए धारा 144 लगा दी गई है, साथ ही प्रभावित हुए ग्रामों को लगातार खाली कर रहे हैं और अगले आदेश तक ग्रामीणों को नहीं रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सुनी कलाई लेकर घटनास्थल पहुंचे युवा नेतृत्व रेवतीरमण

धरमपुरी तहसील तहसील के काराम बांध के लीकेजिंग की ख़बर सुनते ही समाजसेवी और युवा नेतृत्व रेवतीरमन राजूखेड़ी घटनास्थल पर पहुंचे, आपको बता दें कि घटना की ख़बर सुनते ही अपनी बहन को राखी बांधने के लिए इंतजार करवाते छोड़ रेवती रमन अपने ग्रह ग्राम से 100 किलोमीटर दूर घटनास्थल पहुंचकर प्रभावित हुए ग्रामीणों से मिले। उन्हें दिलासा दिया और जल्द ही शुभ समाचार मिलने की कामना की। बता दे की प्रभावित हुए ग्रामों में अधिकतम आदिवासी समाज निवासरत है, अपने आदिवासी ग्रामीणों को इस दुख की घड़ी में सहयोग और उनके साथ खड़े होने के के लिए प्रभावित हुए गांव पहुंचे तथा रोते हुए ग्रामीणों को गले लगाया और उन्हें आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बड़ी दुख की बात है अचानक गांव वालों पर यह मुसीबत आ पड़ी इस समय प्रशासन के साथ-साथ हमारा भी कर्तव्य है कि ग्राम वासियों को उचित राहत पहुंचाएं उनके साथ इस दुख की घड़ी में खड़े होकर उनका सहयोग करें। आपको बता दे की रेवती रमण जो की पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गजेंद्रसिंह राजूखेड़ी के पुत्र हैं और पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए समाज में अपने योग्यता अनुसार सेवा दे रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button