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पूर्व मंत्री उमंग सिंगार को हिमाचल प्रदेश की स्क्रीनिंग कमेटी मेंबर बनाने के क्या है मायने ?

कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले प्रदेश में पार्टी भरेगी हुंकार : पर्यवेक्षक सचिन पायलेट

नई दिल्ली: (शाहनवाज शेख) बीते दिनों भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं गंधवानी विधायक उमंग सिंगार को राष्ट्रीय नेतृत्व ने हिमाचल प्रदेश स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है, साथ ही दीपा दासमुंसी को कमेटी का चेयरपर्सन तथा धीरज गुर्जर को भी मेंबर बनाया गया था।

मालूम हो आगामी माह में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने को है और सभी पार्टियां अपने-अपने योग्य नेताओं को प्रदेश की अहम जिम्मेदारियां सोप रही है। ताकि भारी बहुमत के साथ प्रदेश को विजय कर अपनी सरकार बनाई जाए। मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री रहे उमंग सिंगार मध्य प्रदेश के एक दबंग आदिवासी नेता होने के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। बीते वर्षों में उन्हें झारखंड जैसे प्रदेश का भी प्रभार दिया गया था, जिससे बाद चुनावी माहौल में बेहतर रिजल्ट देखने को मिले थे। बीते दिनों उन्हें गुजरात का भी प्रभार दिया गया था लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व ने बदलाव करते हुए वर्तमान में उन्हें हिमाचल प्रदेश स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य मनोनीत कर दिया। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए कुल 68 सीटों पर चुनाव होते हैं। 17 निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं और 3 निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में 68 सीटों पर कार्य करने के लिए कई नेताओं को सक्रिय किया जाएगा, लेकिन पार्टी ने स्क्रीनिंग कमेटी बनाकर मुख्य रूप से तीन लोगों को अधिकारित किया है जो प्रदेश की विधानसभा में समस्त कार्य को अपने मार्गदर्शन में रखेंगे। वैसे तो पूर्व मंत्री और गंधवानी विधायक को राष्ट्रीय सचिव होने के नाते पूरे देश में ही पार्टी के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभानी होती है, लेकिन चुनावी माहौल में पार्टियां मुख्य रूप से इन नेताओं को जिम्मेदारियां देकर प्रभारी के रूप में मनोनीत करते हैं।



आप सहित अन्य पार्टीया भी सक्रिय

हिमाचल के पड़ोसी राज्य पंजाब में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी के हौसले बुलंद हैं, तो वहीं अब एक चौथे दल के रूप में देवभूमि जनहित पार्टी ने भी सभी 68 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अब राजनीतिक दलों की सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। देव भूमि हिमाचल प्रदेश की सभी 68 विधानसभा सीटों पर अब चुनावी हलचल स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है। अभी तक हिमाचल प्रदेश में भाजपा कांग्रेस के बीच पिछले 4 दशकों से मुकाबला रहा है। इन्हीं दोनों पार्टियों ने पांच 5 साल के अंतराल पर सरकार बनाई है, लेकिन 2022 का चुनाव खास होने जा रहा है, क्योंकि इस बार चुनाव में आम आदमी पार्टी भी पूरी ताकत के साथ उतर चुकी है। हिमाचल के पड़ोसी राज्य पंजाब में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी के हौसले बुलंद हैं तो वहीं अब एक चौथे दल के रूप में देवभूमि जनहित पार्टी ने भी सभी 68 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। देवभूमि जनहित पार्टी ने राज्य में सामान आयोग के मुद्दे और हिमाचल में खालिस्तान समर्थकों का मुद्दा भी उठाया है, हिमाचल की राजनीति में राजनीतिक दलों की बढ़ रही सक्रियता और संख्या के चलते चुनावी मुकाबला और कड़ा हो जाएगा।

हिमाचल प्रदेश में लगातार नए-नए राजनीतिक दल की सक्रियता बढ़ रही है। ऐसे में देवभूमि जनहित पार्टी नाम के दल ने भी भाजपा की जय राम ठाकुर सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। पार्टी के अध्यक्ष रोहित ठाकुर ने जयराम ठाकुर को झूठा मुख्यमंत्री बताया है, सरकार की नाकामियों को उनकी पार्टी अब जनता के सामने रखेगी, रोहित ठाकुर ने पिछले दिनों ये आरोप लगाया था कि वर्तमान सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है और हिमाचल प्रदेश की जनता इस बारे में जान चुकी है, इसीलिए इस बार प्रदेश में नई सरकार बनेगी।

पर्यवेक्षक सचिन पायलट ने किया दावा

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी हाईकमान की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक सचिन पायलट ने कहा कि हिमाचल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भारी बहुमत से जीत हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल की यह जीत पूरे देश की राजनीतिक हवा बदलेगी। पार्टी मुख्यालय राजीव भवन में कांग्रेस पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा हिमाचल के चुनाव पर पूरे देश की नजरें हैं। उन्होंने कहा हिमाचल लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं में चुनावी हुंकार भरते हुए कहा कि वे आपसी मनमुटाव भूलकर एकजुट होकर काम करें। अब ऐसी दशा में चार पार्टियों के बीच चुनाव लड़ रही कांग्रेस को कड़ी मेहनत के साथ सक्रियता बनाए रखना होगी जिसके लिए पार्टी ने स्क्रीनिंग कमेटी को बनाकर प्रभार सौंपा है। और दबंग नेता उमंग सिंगार को सक्रियता के साथ प्रदेश की कमान संभालना होगी, जिसके लिए वह पूर्ण रुप से तैयार हैं।

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