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आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने टनलिंग और भूमिगत अंतरिक्ष इंजीनियरिंग का उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हेतु समझौता-ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए

दीपचंद सोनकर

वाराणसी । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी ने सुरंग निर्माण और भूमिगत अंतरिक्ष इंजीनियरिंग के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए 31 अगस्त 2022 को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के साथ एक समझौता-ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए । इसके दो केंद्र होंगे, पहला आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में और दूसरा दिल्ली मेट्रो रेल अकादमी में होगा । एमओयू के तहत परिवहन और सीमा रक्षा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के बीच संबंधों को मजबूती देगा । भारत में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में वृद्धि देखने को मिल रहा है । कुल 32 मेट्रो परियोजनाएं और 13 रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम पूर्ण/निर्माणाधीन हैं।

संस्थान के निदेशक आचार्य प्रमोद कुमार जैन ने कहा कि समझौता-ज्ञापन आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी और डीएमआरसी के बीच सहयोग की भावना को मजबूत करेगा । परिवहन और रक्षा के लिए सुरंग बनाने में तकनीकी नवाचार का प्रयोग देश के विकास में सहायक होगा । उन्होंने आगे कहा कि इस केंद्र के तहत, संस्थान टनलिंग और भूमिगत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्नातक लघु / प्रमुख पाठ्यक्रमों के साथ-साथ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की पहल करेगा । डीएमआरसी फील्ड इंजीनियरों और निर्माण पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पेश करेगा । केंद्र में संकाय विकास कार्यक्रम भी होंगे । केंद्र के तहत विकसित विशेष सुविधाएं अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास के लिए सरकारी और निजी एजेंसियों से प्रायोजित परियोजनाओं को आकर्षित करेंगी । इसके अलावा, परियोजना के माध्यम से औद्योगिक परामर्श बुनियादी ढांचे के विकास में मदद करेगा ।

डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक (एम.डी.) श्री विकास कुमार ने बताया कि करार के तहत टनलिंग और भूमिगत स्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हमारे अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और अत्याधुनिक अनुसंधान योगदान में सुधार होगा ।

समझौता-ज्ञापन पर आईआईटी (बीएचयू) के अधिष्ठाता (अनुसंधान एवं विकास) आचार्य विकास कुमार दुबे और डीएमआरसी के निदेशक (कार्य) श्री दलजीत सिंह ने हस्ताक्षर किए । समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर कार्यक्रम में सभी अधिष्ठाता (शैक्षणिक कार्य), अधिष्ठाता (छात्र कल्याण), अधिष्ठाता (संकाय कार्य), अधिष्ठाता (संसाधन एवं पूर्व छात्र), सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक और संचार, खनन इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्षों ने भाग लिया और डीएमआरसी की ओर से निदेशक (कार्य), उप मुख्य अभियंता मौजूद थे ।

मई 2015 में, केंद्र सरकार ने 50 शहरों के लिए मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दी और 5 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की । जिसमें राज्य और केंद्र सरकार के आधी आधी संयुक्त रूप में भागीदारी होगी । 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की टनलिंग परियोजनाएं अगले 05 वर्षों में केवल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा निष्पादित किए जाने हैं । इन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के तहत 1000 किलोमीटर (लगभग) की लंबाई की भूमिगत सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा, भारत का लक्ष्य परिवहन व्यवस्था में सुधार लाने और इसके परिणामस्वरूप हमारी रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र में कई सुरंगों का निर्माण करना है ।

डीएमआरसी भारत सरकार का एक प्रमुख उद्यम है, जिसके पास भारत और विदेशों में मेट्रो, मोनोरेल और सेमी-स्पीड रेल परियोजनाओं की योजना, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव की विशेषज्ञता है और एक समृद्ध डेटाबेस रखता है। डीएमआरसी द्वारा दिन-प्रतिदिन कई तकनीकी समस्याओं का सामना किया जाता है और इसके लिए बहु-विषयक समाधान की आवश्यकता होती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि टनलिंग परियोजनाएं अपनी इंजीनियरिंग समस्याओं और अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए स्वदेशी समाधान देखती हैं । संस्थान के पास सिविल इंजीनियरिंग, माइनिंग इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बेहतर विशेषज्ञता है। संस्थान में केंद्र के रूप में परियोजना नियोजन, नवीन डिजाइन, सुरक्षा माप, संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी, रेट्रोफिटिंग आदि के लिए विशेषज्ञता है । 21 वीं सदी के भारत के विकास इंजन को चलाने के लिए सुरंग और भूमिगत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी और डीएमआरसी दोनों मुख्य इंजीनियरिंग मुद्दों को हल करने के लिए एक साथ हैं । टनलिंग उद्योग के लिए केंद्र एक अग्रणी शुरुआत करेगा और सरकार’ के’आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा ।

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