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सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

नई दिल्ली : केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर लोगों को अपनी मानसिकता को बदलने की जरूरत पर बल दिया। केंद्रीय मंत्री ने जाने-माने उद्योगपति और टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की सड़क हादसे में हुई मौत का जिक्र करते हुए कहा यह पूरे देश के लिए बेहद दुखद घटना है। गौरतलब हो साइरस मिस्त्री की मौत एक सड़क हादसे में हो गई थी। प्राथमिक जांच में सामने आया कि वह पीछे की सीट पर बैठे थे और उन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। इसी को लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर कई अहम बातें बताई। आइए जानते हैं इनके बारे में…

सड़क सुरक्षा को लेकर हमारी सबसे बड़ी समस्या

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि देश में हर साल पांच लाख सड़क हादसे होते हैं। वहीं करीब 1 लाख 50 हजार लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से करीब 65% की मौत 18 से 34 वर्ष के लोगों की होती है।

सरकार चार आयामों पर कर रही काम

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार चार आयामों पर काम कर रही है। इनमें ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, रोड इंजीनियरिंग, एजुकेशन और सबसे प्रमुख रोड सेफ्टी कानूनों का क्रियान्वयन है। उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए समाज और मीडिया के सहयोग की सबसे अधिक जरूरत है।

समाज के सहयोग के बिना सड़क सुरक्षा नियम नहीं होंगे प्रभावी
उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर देश में काफी सारी समस्याएं हैं क्योंकि समाज के सहयोग के बिना इन्हें प्रभावी नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में भारतीयों को रोड सेफ्टी के मामले में मानसिकता को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, हमें लगता है कि पीछे की सीट पर सीट बेल्ट की जरूरत नहीं है, लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा, हमें अपनी मानसिकता को बदलना होगा और नियमों का पालन करना ही होगा।

क्या भारतीयों की जान की कीमत नहीं है ?

केंद्रीय परिवहन मंत्री ने बताया कि ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के लिहाज से भी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। जैसे गाड़ियों में 6 एयरबैग को मैंडेटरी किया जाना। इसे लेकर सरकार नया कानून लाने को लेकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, भारत में कारें बनाने वाली कंपनियां जब विदेशों में एक्सपोर्ट करती हैं तो छह एयरबैग लगाकर देती हैं, लेकिन भारत में वह चार एयरबैग लगाकर बेचती हैं। क्या भारत में लोगों की जान की कीमत नहीं है?

एक एयरबैग की कीमत मात्र 900 रुपए के आसपास
उन्होंने कहा, यह भी कहना गलत होगा कि छह एयरबैग से कार की कीमत 50 से 60 हजार रुपए ज्यादा हो जाएगी। जब बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है तो एक एयरबैग की कीमत मात्र 900 रुपए के आसपास होती है।

अहमदाबाद-मुंबई हाइवे खतरनाक

अहमदाबाद-मुंबई हाइवे पर साइरस मिस्त्री की मौत के बाद गडकरी ने कहा, यह हाइवे बहुत ही खतरनाक है। यहां, ट्रैफिक पीसीयू 1.20 लाख से ज्यादा है, जिसे कम किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा, इसे घटाकर 20 हजार पीसीयू करना है।

उन्होंने आगे बताया कि इसे कम करने के लिए थ्री-लेयर के फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं। वन लेयर-ग्राउंड लेवल पर 8 लेन रोड होगी जिसके ऊपर 6 लेन का फ्लाईओवर होगा और फिर उसके ऊपर भी 6 लेन का फ्लाईओवर होगा और अंत में उनके ऊपर मेट्रो का फ्लाईओवर होगा।

अहमदाबाद-मुंबई हाइवे का भार कैसे होगा कम ?

अहमदाबाद-मुंबई हाइवे का भार कम करने के लिए दिल्ली-मुंबई हाइवे का काम जारी है जिसका 70 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह न्यू अलाइनमेंट होगा जो इस रूट पर ट्रैफिक डेंसिटी (यातायात घनत्व) को कम करेगा।

रोड सेफ्टी की दिशा में हो रहे बहुत से काम

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, रोड सेफ्टी की दिशा में बहुत से काम हो रहे हैं। हमें सड़क हादसों को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि मेरा लक्ष्य 2024 के अंत तक करीब 50 प्रतिशत सड़क हादसों को कम करना है। चूंकि भारत में दुनिया का दूसरा सबसे बड़े रोड नेटवर्क है इसलिए ये टास्क पूरा करना अपने आप में बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य है।

भारत में 56 लाख किलोमीटर का सड़क जाल

भारत में 56 लाख किलोमीटर की सड़क मौजूद हैं। इनमें से केवल 2 प्रतिशत ही नेशनल हाइवे हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जब उन्होंने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय संभाला था तो देश में 96 हजार किलोमीटर के नेशनल हाइवे थे जिसे उनके कार्यकाल में 1 लाख 47 हजार किलोमीटर तक ले जाया गया और अब इसे 2 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है। जब यह 2 लाख किलोमीटर में तब्दील हो जाएंगे तो करीब 60-65 % ट्रैफिक नेशनल हाइवे पर चलेगा। इससे संभवत: बड़ा सुधार होगा।

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