Breaking News

हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करता वाराणसी की रामलीला

सत्येंद्र कुमार नन्दा

वाराणसी। काशी यू तो विविधताओं का शहर है। इसको देश की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। वैसे तो काशी में तमाम धार्मिक आयोजन होते हैं। लेकिन इस बार हम एक ऐसी रामलीला की बात कर रहे हैं जो काशी के गंगा-जमुनी तहजीब को बरकरार रखते हुए, एक मिसाल पेश कर रहा है। वाराणसी के फुलवरिया में श्री रामलीला समिति द्वारा सन् 1992 से रामलीला का आयोजन किया जाता है। जिसमें रामलीला के पात्रों में हिंदू-मुस्लिम दोनो समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। साथ ही साथ यहां के रहने वाले लोग चाहे हिंदू हो या मुस्लिम सभी लोग रामलीला मंचन को भी देखते हैं। वही रामलीला में भगवान राम की आरती मुस्लिम समुदाय के लोग भी करते हैं।

वही रामलीला समिति के संस्थापक डॉक्टर शिव कुमार गुप्ता ने बताया इस रामलीला का उद्देश्य था कि यहां हिंदू मुस्लिम एकता बरकरार रहे। भाईचारा और एकता का संदेश देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक जाए। उन्होंने बताया कि रामलीला की शुरुवात हम और मेरे मुस्लिम मित्र निजामुद्दीन ने मिलकर की थी। रामलीला कमेटी के शुरुआती दौर में 12 साल तक निर्विरोध अध्यक्ष भी निजामुद्दीन थे।
उन्होंने बताया कि रामलीला का रावण भी मुस्लिम समुदाय के लोग ही तैयार करते हैं। शिवकुमार ने कहा पिछले 2 साल कोरोना महामारी के कारण रामलीला का मंचन बाधित रहा। लेकिन अब फिर से रामलीला का मंचन पूरी भव्यता के साथ होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button