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मनावर – कुक्षी मार्ग पर मध्यप्रदेश का पहला बगैर सुविधाओं वाला टोल प्लाजा ?

7 वर्षों से सुविधाओं का अभाव, नियमों के विरुद्ध ही किया जा रहा संचालन

आदिवासी बहुल क्षेत्र में इतनी बड़ी लापरवाही समझ से परे

मनावर:- (शाहनवाज़ शेख) MPRDC विभाग से अनुबंध देदला टोल प्लाजा पर आश्चर्यचकित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 7 वर्षों से बगैर मूलभूत सुविधाओं के ही संचालन किया जा रहा है टोल प्लाजा, जानकारी पूछने पर बचते दिखे कर्मचारी।

प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश की सड़कों पर टोल प्लाजाओं का निर्माण यात्रियों को बेहतर सुख-सुविधाएं मिलने तथा सुरक्षित यात्रा देने के लिए किया जाता है। जिससे कारण उन्हें कर वसूलने के अधिकार मिलते है। यह टोल प्लाजा वाहनों से तय की गई राशि वसूलते हैं, जिसके बदले टोल प्लाजा संचालक यात्रियों को नियमानुसार बेहतर सुविधाएं मुहैया कराता है। लेकिन जब हमारी टीम ने मनावर – कुक्षी मार्ग पर बने देदला स्तिथ टोल प्लाजा पर जाकर दौरा किया तो पता चला कि मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन के द्वारा बनाये नियमों को ताक में रखकर रोड निर्माण कम्पनी अग्रोह इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा खुद के नियमो से टोल प्लाजा संचालित किया जा रहा है। नियम अनुसार अगर कोई यात्री अपने वाहन को लेकर टोल रोड से गुजरता है तो बदले में उसे निर्धारित कर देना होता है, तो क्या टोल कंपनियां भी यात्रियों को उसके बदले अपना फर्ज निभा रही है ?


ड्युटी पर उपस्थित कर्मचारी से चर्चा करने पर पता चला की टोल प्लाजा पर सोचालय न होने के कारण गांव में बने क्वाटरो में जाने पड़ता है। और एक ओर बात का खुलासा हुआ की टोल पर क्रेन ही नही है, क्रेन का उपयोग होने पर उसे कुक्षी या नजदीकी जगहों से बुलाया जाता है। जिसको 35 किमी. दूरी का सफर तय करके टोल पर आना पड़ता है। जबकि एमपीआरडीसी के नियमानुसार 24 घण्टे क्रेन को टोल प्लाजा पर उपलब्ध रहना है। जब हमने दुर्घटना ग्रस्त व्यक्तियों को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने वाली एम्बुलेंस ओर डॉक्टर के बारे में पूछा तो चोकाने वाली बात सामने आई। एम्बुलेंस अधिकतम स्टाफ को लाने ले जाने का कार्य कर रही है और डॉक्टर तो ड्यूटी पर दिखाई ही नहीं देते। ऐसे में टोल प्लाजा चलाना इनके मनमर्ज़ी का काम दिख रहा है। डॉक्टर ओर क्रेन उपलब्ध न होने से इमरजेंसी दुर्घटना के शिकार व्यक्ति अपनी मत्यु तय मान ले, क्योंकि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को नजदीकी शहर के स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाने में काफी समय लग सकता है, जिसमे पीड़ित की हालत गम्भीर हो सकती है और जान भी जाने का खतरा बढ़ता है तथा इसका जिम्मेदार ओर कोई नही बल्कि टोल संचालक होना चाहिए, जीसने नियमानुसार टोल प्लाजा पर सुविधाए नही दे रखी है। परन्तु डॉक्टर्स की टीम, स्टाफ होने से पीड़ित को तत्काल उपचार देकर बचाया जा सकता है। अगर ये सभी सुविधाएं टोल पर उपलब्ध नही है तो रोड़ निर्माण कम्पनी को टोल वसूलने का कोई अधिकार होना चाहिए, ओर तो ओर लगता हे MPRDC विभाग ने भी मध्यप्रदेश में टोल प्लाज़ाओ पर सुरक्षा सुविधा की दृष्टि से सर्वे करना बंद कर दिया है, तभी तो इतनी बड़ी कमियां टोल पर इन्हें नही दिखाई दे रही है। रोड़ के निर्माण होने के बाद इन्हें अपनी मर्ज़ी से टोल वसूलने के लिए छोड़ दिया है। 7 वर्षों से अधिक समय बीत चुका है टोल प्लाजा पर शुल्क वसूलते हुए लेकिन अभी तक सुविधाओं का अभाव होना संबंधित विभाग की बड़ी कमियां दिखाता है।

टोल प्लाजा पर कमियां ?

• दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के लिए 24 घंटे सुविधायुक्त एम्बुलेंस सुविधा नहीं।
• दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को किनारे करने के लिए हेवी क्रेन नही।
• यात्रियों, चालकों एवं महिलाओं के लिए सुलभ शौचालय नहीं।
• बस ले बाय एवं कोई प्रतीक्षालय उपलब्ध नहीं।
• इमरजेंसी उपचार के लिए डॉक्टर की टीम नहीं।
• सड़क की सही मरम्मत नहीं।
• टोल प्लाजा पर कोई बिल्डिंग नहीं कंटेनर में चल रहे हैं काम।
• सड़क के बीचो बीच और किनारे में मार्गदर्शन के लिए सेंटर वाइट लाइन बराबर नहीं।
• संपूर्ण सड़क के निर्धारित स्थानों पर सूचना संकेतक।
• शुद्ध पेयजल की कोई विशेष सुविधा नहीं, आदि।

प्राप्त जानकारी के अनुसार टोल प्लाजा को टोल वसूलने का अधिकार लगभग 2014 से लेकर 2042 तक की अवधि के लिए दिया गया है। जिसमें से 7 वर्ष पूरे हो चुके अब यह आश्चर्यचकित मामला है कि 7 वर्षों से बिना सुविधाओं के टोल प्लाजा संचालित किया जा रहा है और इतनी बड़ी चूक संबंधित अधिकारियों को नहीं दिखाई दी। जबकि मनावर कुक्षी मुख्य मार्ग होकर गुजरात से जोड़ने वाला स्टेट हाईवे है, जहां छोटे बड़े हजारों वाहन प्रतिदिन इस मार्ग से होकर गुजरते है। जिस पर 39 किलोमीटर दूरी के लिए टोल वसूला जाता है। इस स्टेट हाईवे की सुरक्षा एक बगैर सुविधाओं की मारुति वैन द्वारा की जा रही है जो मरीजों और घायलों को सड़क मार्ग से स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाने काम करती है। जिसमें ना तो कोई फर्स्ट एड बॉक्स दिखाई दिया और ना ही ऑक्सीजन सिलेंडर। इतना बड़ा चौंकाने वाला मामला देखकर जब हमने संबंधित कर्मचारी से इस बारे में पूछा गया तो बताया गया कि कंपनी के द्वारा यही वाहन एंबुलेंस के रूप में उपलब्ध की गई है और इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए मैनेजमेंट से बात करना होगी। जब हमने इस सम्बन्ध में कंपनी के मुख्य कार्यालय में बैठे हुए पदाधिकारी हारून खान से बात करना चाही तो वह चर्चाओं से बचते नजर आए और फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।

कितना घातक है बैगर सुविधा वाला यह मार्ग।

स्टेट हाईवे होने के साथ-साथ बीते वर्षो की तुलना इस मार्ग पर तेजी से यातायात बढ़ने लगे हैं यहां तक की मनावर में विश्व प्रसिद्ध सीमेंट फैक्ट्री अल्ट्राटेक यूनिट और जीराबाद में सागर सीमेंट प्लांट बनने के बाद यातायात और तेजी से बढ़ गए हैं। सैकड़ों सीमेंट के ट्राले अलीराजपुर, गुजरात की ओर इसी मार्ग से जाते हैं। बालू रेत से भरे बड़े बड़े ट्राले- ट्रक और यात्री बसें भी इसी मार्ग से होकर कुक्षी अलीराजपुर और गुजरात का सफर तय करते हैं। ऐसे में यात्रियों के जान-माल की सुरक्षा सुविधा को देखते हुए टोल प्लाजा के नियम और सुविधा देने के प्रोटोकॉल बनाए जाते हैं, लेकिन टोल प्लाजा द्वारा इतनी बड़ी लापरवाही समझ से परे है। ऐसे लापरवाही पूर्वक टोल संचालकों को मध्य प्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभाव से टोल वसूलने का अधिकार छीन लेना चाहिए, चुकी धार जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है जहां पर ग्रामीण रोजमर्रा का जीवन जीने के लिए इन्हीं सड़कों पर प्रतिदिन आवागमन करते हैं। पूर्व में भी इस मार्ग पर कई दुर्घटनाएं हुई है जिसमें लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उक्त मामले की जानकारी क्षेत्रीय विधायक डॉ हीरालाल अलावा के संज्ञान में भी दिया गया, जिसको लेकर वह विधानसभा में इस मुद्दे को प्रश्न के रूप उठाए जा सके।

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