आईआईटी-बीएचयू के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का सब्र टूटा, निदेशक कार्यालय का किया घेराव

वाराणसी।आईआईटी (बीएचयू) के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का सब्र शुक्रवार को टूट गया। लंबे समय से लंबित मांगों पर प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने और 10 दिनों का अल्टीमेटम समाप्त होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नाराज कर्मचारियों ने गैर-शैक्षणिक कर्मचारी अंतरिम फोरम के बैनर तले निदेशक कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले आठ से 14 वर्षों से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। फोरम की ओर से तीन अगस्त, 19 अगस्त, एक सितंबर, 11 सितंबर और 16 सितंबर को मांग-पत्र सौंपे गए थे, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के नियमों के अनुसार सभी संवर्गों के कर्मचारियों को निर्धारित तिथि से वित्तीय उन्नयन का लाभ देना, मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों की पदोन्नति में लिखित परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करना, आवास की समस्या दूर करने के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन के समन्वय से जमीन चिह्नित कर नए आवासों का निर्माण शुरू कराना और नए नियुक्त कर्मचारियों को उच्च शिक्षा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने की प्रक्रिया सरल करना शामिल है। इसके अलावा केंद्रीय स्वायत्त निकायों के अनुरूप कर्मचारी हित में निर्णय लेने, वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नीति बनाने, वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए संस्थान स्तर पर स्थायी समिति गठित करने, छात्र-कर्मचारी अनुपात बनाए रखने और प्रशासनिक शोषण पर रोक लगाने की मांग की गई है। फोरम का आरोप है कि प्रशासन वित्त मंत्रालय में मामला लंबित होने का हवाला देकर मांगों को टाल रहा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने के बाद अब वे अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। फोरम ने आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाले संभावित प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवधानों के लिए संस्थान प्रशासन और कुलसचिव कार्यालय को जिम्मेदार ठहराते हुए निदेशक से तत्काल हस्तक्षेप करने, लंबित मांगों पर निर्णय लेने और कर्मचारियों को उनका न्यायसंगत अधिकार दिलाने की अपील की है।



